Thursday, 24 September 2015

मै कोन हूँ ? Mai Kaun Hun?


    ना कोई   प्यार करता है , ना कोई करने देता है  हमें !  ऐसा लगता है दुनिया बनाई तो  बनानेवाले ने , पर इस  दुनिया में जो  चीज बनाई है,  ''इन्सान '' ! वह कुछ समझ में नहीं आ रहा है ! अब तक जो दुनिया देखि है मैंने उसमे कुछ समझने लायक दिखा ही नहीं मुझे ! इस दुनिया में कुछ ऐसे लोगों को भी देखा है जो जीने लायक नहीं है ,  और ऐसे भी लोगों को देखा है ,सब कुछ होते हुए भी जीने लायक नहीं है ! सवाल तो बहोत होते है मन हि मन में , कि  '' मैं कौन हूँ ? ''
                
         मैं कौन हूँ ? जो दुनिया में जीने का  ढंग नहीं सीख पा रहा हूँ !
        मै कौन हूँ ? जो इस दुनिया में कामयाबी तक क्यूँ  नहीं पहुँच पा रहा हूँ ?
        मै कौन हूँ ? जो इस दुनिया के  किसी एक जगह तक नहीं पहुँच पा रहा हूँ ?
        मै  कौन हूँ ? जो इस दुनिया में इन्सानो के दिल के अन्दर जगह नहीं बना पा रहा हूँ  ?
       इस दुनिया के लोग जो है , कोई पैसे के पिछे तो कोई अपनी तक़दीर ( किस्मत )  के पीछे दौड़ते हुए देखता रहा हूँ !
      इस दुनिया में कोई ऐसा भी होगा जो अपनी परछाई के अंदर भी अपने आप को ढूंढता होगा ?
      सुना तो बहोत है प्रवचन और वाणी , बस सुनते ही थोड़ी देर तक सोचता रहा हूँ !
      कहते है दुनिया में जीने के लिए साथी चाहिए : जिससे कोई  समाधान मिलता हो ? हमे  वोह भी समाधान नहीं मिला !
      ऐसी कोनसी चीज होगी जो  मुझे समाधान  करेगी ?
      तो कुछ दोस्तों ने बताया वह है '' शराब '' !
     ठीक है उसे भी आज़माकर देखा जब '' शराब '' अंदर होती है तो तब कुछ ऐसा होता है जो दिल को मजबूत बनाकर सपनों की दुनिया में चले जाते हैं ! बस '' शराब '' भी यही तक साथी होती है !
    सभी कहते है की इंसान तकदीर ( किस्मत ) लिखकर पैदा होता है , कोई कहता है अपना अपना '' लक '' होता है !
      मै कोन हूँ ? मेरी क्या तकदीर होगी ( किस्मत ) होगी ?
     मेरा क्या ''लक'' होगा ? कुछ समझ  ही नहीं पा रहा  हूँ ! 
    मेरे जैसे बहोत सारे लोग होंगे इस दुनिया में , अपने आप को मन ही मन में कोसते होंगे , मन ही मन में मरते होंगे ? 
     बहोत सोचता हूँ की अपने आप को आगे बढ़ाऊ ?      अपने आप को किस्मतवाला बनाउ ? या तक़दीरवाला बनाऊ ?
    फिर यह सब कैसे होगा उसके लिए तो मेहनत करनी होगी ! चलो मान लो वह भी करके देख ली , आमदनी कितने की हुई ?
     कुछ नहीं हुआ एक साधारण मनुष्य कुछ नहीं बन सकता , उसकी सोच ही उसका अंत है !
Mallhari Kutmulge